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mahabharat 8.34.28: धृतराष्ट्र और अन्य दस सर्प राजाओं को भी ईशा दंड में स्थान दिया गया। फुंफकारते विशाल सर्पों को रथ का जूआ बनाया गया।   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  8.34.28 
दश नागपतीनीषां धृतराष्ट्रमुखांस्तदा।
योक्त्राणि चक्रुर्नागांश्च नि:श्वसन्तो महोरगान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र और अन्य दस सर्प राजाओं को भी ईशा दंड में स्थान दिया गया। फुंफकारते विशाल सर्पों को रथ का जूआ बनाया गया।
 
Dhritarashtra and the other ten kings of snakes were also given a place in the Isha Danda. The hissing large serpents were made the yokes of the chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)