Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.34.21-22: नक्षत्रों का समूह ईशादण्ड बन गया और कृतयुग ने जूए का रूप धारण कर लिया। नागराज वासुकि उस रथ के सारथी बने थे। हिमालय पर्वत, अपस्कर (रथ के पीछे की लकड़ी) और विंध्याचल उसकी आधार लकड़ी बने। उन महान देवताओं ने उदय और अस्त दोनों को पहियों की आधार लकड़ी बना दिया। 21-22॥ | mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नक्षत्रों का समूह ईशादण्ड बन गया और कृतयुग ने जूए का रूप धारण कर लिया। नागराज वासुकि उस रथ के सारथी बने थे। हिमालय पर्वत, अपस्कर (रथ के पीछे की लकड़ी) और विंध्याचल उसकी आधार लकड़ी बने। उन महान देवताओं ने उदय और अस्त दोनों को पहियों की आधार लकड़ी बना दिया। 21-22॥
The group of stars became Ishadanda and Kritayuga took the form of a yoke. Nagraj Vasuki had become the charioteer of that chariot. The Himalayan mountains, Apaskar (the wood behind the chariot) and Vindhyachal became its base wood. Those great gods made both rising and setting as the base wood of the wheels. 21-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥