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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  8.34.2 
तवातिसर्गाद् देवेश प्राजापत्यमिदं पदम्।
मयाधितिष्ठता दत्तो दानवेभ्यो महान् वर:॥ २॥
 
 
अनुवाद
देवेश्वर! आपकी आज्ञा से मैंने इस प्रजापतिपद में स्थित होकर दैत्यों को महान वर दिया है।
 
Deveshwar! By your order, while being situated in this Prajapatipad, I have granted a great boon to the demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)