श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  8.34.17-18h 
ततो विबुधशार्दूलास्ते रथं समकल्पयन्॥ १७॥
विष्णुं सोमं हुताशं च तस्येषुं समकल्पयन्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन देवताओं ने रथ की रचना की और विष्णु, चन्द्रमा और अग्नि इन तीनों को उनके बाण बनाए ॥17 1/2॥
 
Thereafter those gods created the chariot and made Vishnu, Moon and Agni all three as their arrows. 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)