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mahabharat 8.34.162-163: राजन! उसकी भुजाएँ हाथी की सूंड के समान मोटी हैं और उसकी छाती विशाल है, जो समस्त शत्रुओं का संहार करने में समर्थ है। इससे यह स्पष्ट होता है कि परशुराम का यह तेजस्वी शिष्य, महामनस्वी एवं पुण्यात्मा वैकर्तन कर्ण कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। ॥162-163॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 162-163
 
 
श्लोक  8.34.162-163 
यथा ह्यस्य भुजौ पीनौ नागराजकरोपमौ॥ १६२॥
वक्ष: पश्य विशालं च सर्वशत्रुनिबर्हणम्।
न त्वेष प्राकृत: कश्चित् कर्णो वैकर्तनो वृष:।
महात्मा ह्येष राजेन्द्र रामशिष्य: प्रतापवान्॥ १६३॥
 
 
अनुवाद
राजन! उसकी भुजाएँ हाथी की सूंड के समान मोटी हैं और उसकी छाती विशाल है, जो समस्त शत्रुओं का संहार करने में समर्थ है। इससे यह स्पष्ट होता है कि परशुराम का यह तेजस्वी शिष्य, महामनस्वी एवं पुण्यात्मा वैकर्तन कर्ण कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। ॥162-163॥
 
King! His arms are as thick as the proboscis of an elephant and his chest is huge, capable of killing all enemies. This indicates that this glorious disciple of Parasurama, the great-minded and virtuous Vaikartana Karna is not an ordinary person. ॥162-163॥
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि त्रिपुरवधोपाख्याने चतुस्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें त्रिपुरवधोपाख्यानविषयक चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३४॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ७ १/२ श्लोक मिलाकर कुल १७० १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)