श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 161-162h
 
 
श्लोक  8.34.161-162h 
सर्वथा न ह्ययं शल्य कर्ण: सूतकुलोद्भव:।
सकुण्डलं सकवचं दीर्घबाहुं महारथम्॥ १६१॥
कथमादित्यसदृशं मृगी व्याघ्रं जनिष्यति।
 
 
अनुवाद
शल्य! मेरा तो पूरा विश्वास है कि यह कर्ण सुतकुल में उत्पन्न नहीं हुआ था। एक सुतजा जाति की स्त्री इस महाबाहु महारथी और सूर्य के समान तेजस्वी कुण्डल और कवच से विभूषित पुत्र को कैसे जन्म दे सकती है? क्या कोई मृग अपने गर्भ से बाघ को जन्म दे सकता है? 161 1/2॥
 
Surgical! I completely believe that this Karna was not born in Sutkul. How can a Sutja caste woman give birth to this mighty-armed Maharathi and a son adorned with earrings and armor as bright as the Sun? Can any deer give birth to a tiger from its womb? 161 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)