श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  8.34.16-17h 
देवा ऊचु:
मूर्ती: सर्वा: समाधाय त्रैलोक्यस्य ततस्तत:।
रथं ते कल्पयिष्यामो देवेश्वर सुवर्चसम्॥ १६॥
तथैव बुद्‍ध्या विहितं विश्वकर्मकृतं शुभम्।
 
 
अनुवाद
देवताओं ने कहा- देवेश्वर! हम तीनों लोकों से समस्त प्रकाश राशि एकत्रित करके आपके लिए एक अत्यंत तेजस्वी रथ का निर्माण करेंगे। विश्वकर्मा द्वारा बुद्धिपूर्वक निर्मित वह रथ अत्यंत सुंदर होगा।
 
The gods said— Deveshwar! We will collect all the amounts of light from the three worlds and build a very illustrious chariot for you. That chariot built intelligently by Vishwakarma will be very beautiful. 16 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)