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mahabharat 8.34.152: परन्तु महादेवजी के कर-स्पर्श पाते ही परशुरामजी के सारे घाव तत्काल ही दूर हो गए। परशुरामजी के शत्रु-विनाश करने के कार्य से भगवान शंकर अत्यंत प्रसन्न हुए॥152॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  8.34.152 
संस्पृष्ट:स्थाणुना सद्यो निर्व्रण: समजायत।
प्रीतश्च भगवान् देव: कर्मणा तेन तस्य वै॥ १५२॥
 
 
अनुवाद
परन्तु महादेवजी के कर-स्पर्श पाते ही परशुरामजी के सारे घाव तत्काल ही दूर हो गए। परशुरामजी के शत्रु-विनाश करने के कार्य से भगवान शंकर अत्यंत प्रसन्न हुए॥152॥
 
But after getting the touch of Mahadevji's hands, all the wounds of Parashuramji went away immediately. Lord Shankar was very pleased with Parashuram's act of defeating the enemy. 152॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)