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mahabharat 8.34.150-151: भृगुवंशी परशुराम के ऐसा कहने पर राक्षसगण उनसे युद्ध करने लगे। भगवाननन्दन राम ने युद्ध में वज्र और बिजली के समान प्रहारों से उन राक्षसों को मार डाला। इसके अतिरिक्त राक्षसों ने द्विजों में श्रेष्ठ जमदग्निकुमार के शरीर को भी क्षत-विक्षत कर दिया। 150-151॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 150-151
 
 
श्लोक  8.34.150-151 
इत्युक्ता भार्गवेणाथ दैत्या युद्धं प्रचक्रमु:।
स तान् निहत्य समरे दैत्यान् भार्गवनन्दन:॥ १५०॥
वज्राशनिसमस्पर्शै: प्रहारैरेव भार्गव:।
स दानवै: क्षततनुर्जामदग्न्यो द्विजोत्तम:॥ १५१॥
 
 
अनुवाद
भृगुवंशी परशुराम के ऐसा कहने पर राक्षसगण उनसे युद्ध करने लगे। भगवाननन्दन राम ने युद्ध में वज्र और बिजली के समान प्रहारों से उन राक्षसों को मार डाला। इसके अतिरिक्त राक्षसों ने द्विजों में श्रेष्ठ जमदग्निकुमार के शरीर को भी क्षत-विक्षत कर दिया। 150-151॥
 
When Bhriguvanshi Parshuram said this, the demons started fighting with him. Bhagwanandan Ram killed those demons in the battle with blows that touched like thunder and lightning. Besides, the demons also mutilated the body of the best of the twins, Jamadagnikumar. 150-151॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)