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mahabharat 8.34.149: युद्ध के लिए उन्मत्त दैत्यों! मुझे युद्ध दो। महादैत्यों! देवाधिदेव महादेवजी ने मुझे तुम्हें परास्त करने के लिए भेजा है। 149॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  8.34.149 
मम युद्धं प्रयच्छध्वं दैत्या युद्धमदोत्कटा:।
प्रेषितो देवदेवेन वो निजेतुं महासुरा:॥ १४९॥
 
 
अनुवाद
युद्ध के लिए उन्मत्त दैत्यों! मुझे युद्ध दो। महादैत्यों! देवाधिदेव महादेवजी ने मुझे तुम्हें परास्त करने के लिए भेजा है। 149॥
 
Demons who are crazy about war! Give me war. Great demons! Devadhidev Mahadevji has sent me to defeat you. 149॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)