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mahabharat 8.34.147-148: उनकी यह बात सुनकर परशुरामजी सब प्रकार से उसका सिर काटकर तथा स्वस्तिवाचन आदि शुभ कर्म करके दैत्यों का सामना करने के लिए गए और महान् वीरता और बल से संपन्न उन देवताओं के शत्रुओं से इस प्रकार बोले- ॥147-148॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 147-148
 
 
श्लोक  8.34.147-148 
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं प्रतिगृह्य च सर्वश:॥ १४७॥
राम: कृतस्वस्त्ययन: प्रययौ दानवान् प्रति।
अब्रवीद् देवशत्रूंस्तान् महादर्पबलान्वितान्॥ १४८॥
 
 
अनुवाद
उनकी यह बात सुनकर परशुरामजी सब प्रकार से उसका सिर काटकर तथा स्वस्तिवाचन आदि शुभ कर्म करके दैत्यों का सामना करने के लिए गए और महान् वीरता और बल से संपन्न उन देवताओं के शत्रुओं से इस प्रकार बोले- ॥147-148॥
 
Hearing this from them, Parashuram, after beheading him in every way and performing auspicious acts like reciting Swastiva etc., went to face the demons and spoke to those enemies of the gods, endowed with great courage and strength, in this manner – ॥ 147-148॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)