श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 146-147h
 
 
श्लोक  8.34.146-147h 
महेश्वर उवाच
गच्छ त्वं मदनुज्ञातो निहनिष्यसि शात्रवान्॥ १४६॥
विजित्य च रिपून् सर्वान् गुणान् प्राप्यसि पुष्कलान्।
 
 
अनुवाद
महेश्वर ने कहा- राम! तुम मेरी अनुमति लेकर जाओ। तुम देवताओं के शत्रुओं का अवश्य ही संहार करोगे। उन समस्त शत्रुओं को परास्त करके तुम्हें बहुत पुण्य प्राप्त होगा।
 
Maheshwara said- Ram! You go with my permission. You will surely kill the enemies of the gods. You will gain a lot of virtues by defeating all those enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)