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mahabharat 8.34.145-146h: परशुरामजी बोले- हे प्रभु! मैं तो शस्त्रविद्या में पारंगत नहीं हूँ। फिर मुझमें ऐसी क्या शक्ति है कि मैं युद्धभूमि में शस्त्रविद्या जानने वाले और युद्ध में भयंकर रूप से लड़ने वाले समस्त राक्षसों का वध कर सकूँ?॥145 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 145-146h
 
 
श्लोक  8.34.145-146h 
राम उवाच
का शक्तिर्मम देवेश अकृतास्त्रस्य संयुगे॥ १४५॥
निहन्तुं दानवान् सर्वान् कृतास्त्रान् युद्धदुर्मदान्।
 
 
अनुवाद
परशुरामजी बोले- हे प्रभु! मैं तो शस्त्रविद्या में पारंगत नहीं हूँ। फिर मुझमें ऐसी क्या शक्ति है कि मैं युद्धभूमि में शस्त्रविद्या जानने वाले और युद्ध में भयंकर रूप से लड़ने वाले समस्त राक्षसों का वध कर सकूँ?॥145 1/2॥
 
Parshuram said— O lord! I am not an expert in the art of weapons. Then what power do I have to kill all the demons who know the art of weapons and are fierce in battle on the battlefield?॥ 145 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)