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mahabharat 8.34.143: तब मंगलमय महादेवजी ने भृगुनन्दन परशुरामजी को बुलाकर देवताओं के समक्ष शत्रुओं का नाश करने की प्रतिज्ञा की और इस प्रकार कहा- 143॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 143
 
 
श्लोक  8.34.143 
प्रतिज्ञाय ततो देवो देवतानां रिपुक्षयम्।
रामं भार्गवमाहूय सोऽभ्यभाषत शङ्कर:॥ १४३॥
 
 
अनुवाद
तब मंगलमय महादेवजी ने भृगुनन्दन परशुरामजी को बुलाकर देवताओं के समक्ष शत्रुओं का नाश करने की प्रतिज्ञा की और इस प्रकार कहा- 143॥
 
Then the auspicious Mahadevji called Bhrigunandan Parshuram and vowed in front of the gods to destroy their enemies and said thus - 143॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)