vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना
»
श्लोक 142
श्लोक
8.34.142
अभिगम्य ततो देवा महेश्वरमुमापतिम्।
प्रासादयंस्तदा भक्त्या जहि शत्रुगणानिति॥ १४२॥
अनुवाद
तत्पश्चात् देवतागण उमा वल्लभ महेश्वर के पास गए और उन्हें भक्ति से प्रसन्न करके बोले - 'प्रभो! आप हमारे शत्रुओं का नाश कीजिए।' 142.
Thereafter the Gods went to Uma Vallabh Maheshwar and pleased him with devotion and said - 'Lord! Please destroy our enemies.' 142.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×