श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 142
 
 
श्लोक  8.34.142 
अभिगम्य ततो देवा महेश्वरमुमापतिम्।
प्रासादयंस्तदा भक्त्या जहि शत्रुगणानिति॥ १४२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवतागण उमा वल्लभ महेश्वर के पास गए और उन्हें भक्ति से प्रसन्न करके बोले - 'प्रभो! आप हमारे शत्रुओं का नाश कीजिए।' 142.
 
Thereafter the Gods went to Uma Vallabh Maheshwar and pleased him with devotion and said - 'Lord! Please destroy our enemies.' 142.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)