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mahabharat 8.34.135: हे देवेश्वर! यदि आप मुझे अस्त्र धारण करने के योग्य समझते हैं, तभी मुझ भक्त को दिव्य अस्त्र प्रदान करने की कृपा करें॥135॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  8.34.135 
यदा जानाति देवेश: पात्रं मामस्त्रधारणे।
तदा शुश्रूषवेऽस्त्राणि भवान् मे दातुमर्हति॥ १३५॥
 
 
अनुवाद
हे देवेश्वर! यदि आप मुझे अस्त्र धारण करने के योग्य समझते हैं, तभी मुझ भक्त को दिव्य अस्त्र प्रदान करने की कृपा करें॥135॥
 
‘If you, O Lord Deveshwar, consider me worthy of bearing weapons, then only please grant me, your devotee, divine weapons.’॥ 135॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)