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mahabharat 8.34.133: जब तुम पवित्र हो जाओगे, तब मैं तुम्हें अपने अस्त्र दूँगा, भृगुनन्दन! ये अस्त्र अयोग्य और असमर्थ मनुष्यों को जलाकर भस्म कर देते हैं ॥133॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  8.34.133 
दास्यामि ते तदास्त्राणि यदा पूतो भविष्यसि।
अपात्रमसमर्थं च दहन्त्यस्त्राणि भार्गव॥ १३३॥
 
 
अनुवाद
जब तुम पवित्र हो जाओगे, तब मैं तुम्हें अपने अस्त्र दूँगा, भृगुनन्दन! ये अस्त्र अयोग्य और असमर्थ मनुष्यों को जलाकर भस्म कर देते हैं ॥133॥
 
When you become pure, I will give you my weapons, Bhrigunandan! These weapons burn ineligible and incapable men to ashes. 133॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)