श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  8.34.132 
महेश्वर उवाच
राम तुष्टोऽस्मि भद्रं ते विदितं मे तवेप्सितम्।
कुरुष्व पूतमात्मानं सर्वमेतदवाप्स्यसि॥ १३२॥
 
 
अनुवाद
महादेवजी बोले - राम! तुम्हारा कल्याण हो। मैं तुम पर बहुत प्रसन्न हूँ। मैं जानता हूँ कि तुम क्या चाहते हो। अपना हृदय शुद्ध करो। तुम्हें यह सब मिलेगा॥132॥
 
Mahadevji said - Ram! May you be blessed. I am very pleased with you. I know what you want. Purify your heart. You will get all this.॥ 132॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)