महेश्वर उवाच
राम तुष्टोऽस्मि भद्रं ते विदितं मे तवेप्सितम्।
कुरुष्व पूतमात्मानं सर्वमेतदवाप्स्यसि॥ १३२॥
अनुवाद
महादेवजी बोले - राम! तुम्हारा कल्याण हो। मैं तुम पर बहुत प्रसन्न हूँ। मैं जानता हूँ कि तुम क्या चाहते हो। अपना हृदय शुद्ध करो। तुम्हें यह सब मिलेगा॥132॥
Mahadevji said - Ram! May you be blessed. I am very pleased with you. I know what you want. Purify your heart. You will get all this.॥ 132॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥