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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  8.34.127 
इमं चाप्यपरं भूय इतिहासं निबोध मे।
पितुर्मम सकाशे यद् ब्राह्मण: प्राह धर्मवित्॥ १२७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आप मुझसे यह दूसरी कथा सुनिए, जो एक विद्वान ब्राह्मण ने मेरे पिता से कही थी।
 
O King! Please listen to this other story from me, which a learned Brahmin told to my father. 127.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)