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mahabharat 8.34.123: यह कर्ण युद्धभूमि में रुद्र के समान है और तुम भी नीति में ब्रह्माजी के समान हो; अतः तुम उन दैत्यों के समान मेरे शत्रुओं को भी परास्त करने में समर्थ हो ॥123॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  8.34.123 
युद्धे ह्ययं रुद्रकल्पस्त्वं च ब्रह्मसमो नये।
तस्माच्छक्तो भवाञ्जेतुं मच्छत्रूंस्तानिवासुरान्॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
यह कर्ण युद्धभूमि में रुद्र के समान है और तुम भी नीति में ब्रह्माजी के समान हो; अतः तुम उन दैत्यों के समान मेरे शत्रुओं को भी परास्त करने में समर्थ हो ॥123॥
 
This Karna is like Rudra in the battlefield and you too are like Brahmaji in policy; therefore you are capable of defeating my enemies like those demons. ॥123॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)