Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.34.120-121: जैसे जगत् के रचयिता, परम और अविनाशी पितामह भगवान ब्रह्मा ने रुद्र के सारथी का कार्य किया था और रुद्र के घोड़ों की लगाम संभाली थी, वैसे ही तुम भी शीघ्रतापूर्वक इस महाहृदयी राधापुत्र कर्ण के घोड़ों को वश में करो ॥120-121॥ | mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथैव भगवान् ब्रह्मा लोकधाता पितामह:।
सारथ्यमकरोत्तत्र रुद्रस्य परमोऽव्यय:॥ १२०॥
तथा भवानपि क्षिप्रं रुद्रस्येव पितामह:।
संयच्छतु हयानस्य राधेयस्य महात्मन:॥ १२१॥
अनुवाद
जैसे जगत् के रचयिता, परम और अविनाशी पितामह भगवान ब्रह्मा ने रुद्र के सारथी का कार्य किया था और रुद्र के घोड़ों की लगाम संभाली थी, वैसे ही तुम भी शीघ्रतापूर्वक इस महाहृदयी राधापुत्र कर्ण के घोड़ों को वश में करो ॥120-121॥
Just as the creator of the universe, the supreme and indestructible grandfather Lord Brahma had acted as charioteer for Rudra and had handled the reins of Rudra's horses, you too should quickly control the horses of this great-hearted Radha's son Karna. ॥120-121॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥