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mahabharat 8.34.12: तत्पश्चात देवताओं ने भगवान शिव से ‘तथास्तु’ कहा और सबका आधा-आधा तेज ग्रहण करके वे और भी तेजस्वी हो गए॥12॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.34.12 
ततस्तथेति देवेशस्तैरुक्तो राजसत्तम।
अर्धमादाय सर्वेषां तेजसाभ्यधिकोऽभवत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात देवताओं ने भगवान शिव से ‘तथास्तु’ कहा और सबका आधा-आधा तेज ग्रहण करके वे और भी तेजस्वी हो गए॥12॥
 
The best! Thereafter, the gods said 'Tathaastu' to Lord Shiva and after taking half of everyone's glory, they became more brilliant. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)