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mahabharat 8.34.117: तब तीनों लोकों के सभी देवता, ऋषि और प्राणी स्वस्थ हो गए और सबने उत्तम वचनों से अतुलित पराक्रमी महादेवजी की स्तुति की ॥117॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  8.34.117 
तत: प्रकृतिमापन्ना देवा लोकास्त्वथर्षय:।
तुष्टुवुर्वाग्भिरग्रॺाभि: स्थाणुमप्रतिमौजसम्॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
तब तीनों लोकों के सभी देवता, ऋषि और प्राणी स्वस्थ हो गए और सबने उत्तम वचनों से अतुलित पराक्रमी महादेवजी की स्तुति की ॥117॥
 
Then all the gods, sages and beings of the three worlds became healthy. Everyone praised the incomparably powerful Mahadevji with noble words. 117॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)