Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.34.115: इस प्रकार तीनों लोकों का कल्याण चाहने वाले महेश्वर ने क्रोधित होकर उन तीनों नगरों को उनमें रहने वाले राक्षसों सहित जला डाला। 115. | mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं तु त्रिपुरं दग्धं दानवाश्चाप्यशेषत:।
महेश्वरेण क्रुद्धेन त्रैलोक्यस्य हितैषिणा॥ ११५॥
अनुवाद
इस प्रकार तीनों लोकों का कल्याण चाहने वाले महेश्वर ने क्रोधित होकर उन तीनों नगरों को उनमें रहने वाले राक्षसों सहित जला डाला। 115.
Thus, Maheshwar, who desires the welfare of the three worlds, became angry and burnt down those three cities along with the demons living in them. 115.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥