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mahabharat 8.34.107-108h: तत्पश्चात् भगवान् रुद्रने धनुषपर प्रत्यंचा चढ़ाकर उसपर पूर्वोक्त बाण स्थापित किया और उसे पाशुपतास्त्रसे संयोजित करके तीनों पुरोंके एकत्र होनेका विचार किया ॥107 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 107-108h
 
 
श्लोक  8.34.107-108h 
अथाधिज्यं धनु: कृत्वा शर्व: संधाय तं शरम्॥ १०७॥
युक्त्वा पाशुपतास्त्रेण त्रिपुरं समचिन्तयत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान् रुद्रने धनुषपर प्रत्यंचा चढ़ाकर उसपर पूर्वोक्त बाण स्थापित किया और उसे पाशुपतास्त्रसे संयोजित करके तीनों पुरोंके एकत्र होनेका विचार किया ॥107 1/2॥
 
Thereafter, Lord Rudra put the string on the bow and placed the aforesaid arrow on it and combined it with Pashupatastra and contemplated the coming together of the three Puras. 107 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)