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mahabharat 8.34.1: दुर्योधन ने कहा - हे राजन! जब परम पुरुषोत्तम भगवान शिव ने देवताओं, पितरों तथा ऋषियों के समूह को अभयदान दिया, तब ब्रह्माजी ने भगवान शंकर का सत्कार किया और लोक-कल्याण के लिए ये वचन कहे -॥1॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.34.1 
दुर्योधन उवाच
पितृदेवर्षिसंघेभ्योऽभये दत्ते महात्मना।
सत्कृत्य शङ्करं प्राह ब्रह्मा लोकहितं वच:॥ १॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा - हे राजन! जब परम पुरुषोत्तम भगवान शिव ने देवताओं, पितरों तथा ऋषियों के समूह को अभयदान दिया, तब ब्रह्माजी ने भगवान शंकर का सत्कार किया और लोक-कल्याण के लिए ये वचन कहे -॥1॥
 
Duryodhan said - O King! When the Supreme Lord Shiva gave protection to the Gods, ancestors and the group of sages, then Lord Brahma honored Lord Shankar and said these words for the welfare of the people -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)