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mahabharat 8.33.62: हे परम तेजस्वी भगवान त्र्यम्बक, आपको सेना सहित नमस्कार है। हे प्रभु! हम मन, वाणी और कर्म से आपकी शरण में आये हैं। कृपया हमें स्वीकार करें।॥ 62॥   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  8.33.62 
नमोऽस्तु ते ससैन्याय त्र्यम्बकायामितौजसे।
मनोवाक्कर्मभिर्देव त्वां प्रपन्नान् भजस्व न:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
हे परम तेजस्वी भगवान त्र्यम्बक, आपको सेना सहित नमस्कार है। हे प्रभु! हम मन, वाणी और कर्म से आपकी शरण में आये हैं। कृपया हमें स्वीकार करें।॥ 62॥
 
Salutations to you, the immensely illustrious Lord Tryambaka along with his army. O Lord! We have come to your refuge by mind, speech and action. Please accept us.'॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)