श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  8.33.61 
वनस्पतीनां पतये नराणां पतये नम:।
गवां च पतये नित्यं यज्ञानां पतये नम:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
आप वनस्पतियों के पालक और मनुष्यों के स्वामी हैं। आप गौओं के स्वामी और यज्ञों के अधिष्ठाता देवता हैं। मैं आपको बारम्बार नमस्कार करता हूँ। 61.
 
‘You are the preserver of vegetation and the lord of men. You are the master of cows and the presiding deity of sacrifices. I repeatedly salute you. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)