श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  8.33.48 
तुष्टुवुर्वाग्भिरिष्टाभिर्भयेष्वभयदं नृप।
सर्वात्मानं महात्मानं येनाप्तं सर्वमात्मना॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! उन देवताओं ने इच्छित वचनों द्वारा परमात्मा महात्मा भगवान शिव की स्तुति की, जो अपनी आत्मा से सबको व्याप्त किये हुए हैं और जो भय के समय अभय प्रदान करते हैं॥48॥
 
Nareshwar! Those deities, through desired words, praised the Supreme Soul, Mahatma Lord Shiva, who has pervaded everyone with his soul and who provides fearlessness in times of fear. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)