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mahabharat 8.33.47: तप और नियम का आश्रय लेकर, ऋषियों सहित धर्मज्ञ पुरुष सम्पूर्ण मन से उनकी स्तुति करते हुए सनातन ब्रह्मस्वरूप महादेवजी की शरण में गए॥47॥   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  8.33.47 
तपो नियममास्थाय गृणन्तो ब्रह्म शाश्वतम्।
ऋषिभि: सह धर्मज्ञा भवं सर्वात्मना गता:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तप और नियम का आश्रय लेकर, ऋषियों सहित धर्मज्ञ पुरुष सम्पूर्ण मन से उनकी स्तुति करते हुए सनातन ब्रह्मस्वरूप महादेवजी की शरण में गए॥47॥
 
Taking shelter of penance and rules, the religious sages along with the sages went to seek refuge with Mahadevji in the form of eternal Brahma, praising him with all their heart. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)