Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.33.45: अतः हे अदितिकुमार! तुम स्वतः ही महापराक्रमी, विजयी, पुरुषोत्तम महादेवजी को योद्धा के रूप में चुन लो। वे ही उन दैत्यों का वध कर सकते हैं।॥ 45॥ | mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते यूयं स्थाणुमीशानं जिष्णुमक्लिष्टकारिणम्।
योद्धारं वृणुतादित्या: स तान् हन्ता सुरेतरान्॥ ४५॥
अनुवाद
अतः हे अदितिकुमार! तुम स्वतः ही महापराक्रमी, विजयी, पुरुषोत्तम महादेवजी को योद्धा के रूप में चुन लो। वे ही उन दैत्यों का वध कर सकते हैं।॥ 45॥
‘Therefore, Aditikumar! You should automatically choose the great performer, the victorious, the Supreme Being, Mahadevji as the warrior. Only he can kill those demons.’॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥