Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.33.44: वे तीनों नगर एक ही बाण से बींधने पर नष्ट हो सकते हैं, अन्यथा नहीं; परंतु महादेवजी के अतिरिक्त ऐसा कोई नहीं है जो उन तीनों नगरों को एक ही बाण से एक साथ बींध सके। | mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकेषुणा विभेद्यानि तानि दुर्गाणि नान्यथा।
न च स्थाणुमृते शक्तो भेत्तुमेकेषुणा पुर:॥ ४४॥
अनुवाद
वे तीनों नगर एक ही बाण से बींधने पर नष्ट हो सकते हैं, अन्यथा नहीं; परंतु महादेवजी के अतिरिक्त ऐसा कोई नहीं है जो उन तीनों नगरों को एक ही बाण से एक साथ बींध सके।
Those three cities can be destroyed if they are pierced with a single arrow, otherwise not; but there is nobody other than Mahadevji who can pierce them all three simultaneously with a single arrow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥