Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.33.42: वे समस्त दुष्टात्मा राक्षस, जो देवताओं के द्रोही हैं और जो सदैव तुम्हें कष्ट देते रहते हैं, उन्होंने निश्चय ही मेरे प्रति भी महान अपराध किया है ॥ 42॥ | mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असुरा हि दुरात्मान: सर्व एव सुरद्विष:।
अपराध्यन्ति सततं ये युष्मान् पीडयन्त्युत॥ ४२॥
अनुवाद
वे समस्त दुष्टात्मा राक्षस, जो देवताओं के द्रोही हैं और जो सदैव तुम्हें कष्ट देते रहते हैं, उन्होंने निश्चय ही मेरे प्रति भी महान अपराध किया है ॥ 42॥
All those evil-minded demons, who are traitors to the gods and who always torment you, have certainly committed a great crime against me as well. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥