Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.33.37-39: शत्रुदमननारेश्वर! ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त देवराज इन्द्र जब उन अभेद्य दुर्गों को भेद न सके, तब वे भयभीत होकर उन दुर्गों को छोड़कर उन्हीं देवताओं के साथ ब्रह्माजी के पास जाकर उन दैत्यों के अत्याचारों का हाल कहने लगे॥37-39॥ | mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शत्रुदमननारेश्वर! ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त देवराज इन्द्र जब उन अभेद्य दुर्गों को भेद न सके, तब वे भयभीत होकर उन दुर्गों को छोड़कर उन्हीं देवताओं के साथ ब्रह्माजी के पास जाकर उन दैत्यों के अत्याचारों का हाल कहने लगे॥37-39॥
Shatrudamananareshwar! When Devraj Indra, who had received the boon from Brahmaji, could not penetrate those impenetrable forts, then he got scared and left those forts and went with the same gods to Brahmaji to tell about the atrocities of those demons. 37-39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥