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mahabharat 8.33.35-36h: वे समस्त उद्यान, मुनियों के पवित्र आश्रम तथा सुन्दर जनपद, जो स्वर्गवासियों को अत्यन्त प्रिय थे, वे भी उन दुराचारी तथा दुष्ट राक्षसों ने नष्ट कर दिये।   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  8.33.35-36h 
देवोद्यानानि सर्वाणि प्रियाणि च दिवौकसाम्।
ऋषीणामाश्रमान् पुण्यान् रम्याञ्जनपदांस्तथा॥ ३५॥
व्यनाशयन्नमर्यादा दानवा दुष्टचारिण:।
 
 
अनुवाद
वे समस्त उद्यान, मुनियों के पवित्र आश्रम तथा सुन्दर जनपद, जो स्वर्गवासियों को अत्यन्त प्रिय थे, वे भी उन दुराचारी तथा दुष्ट राक्षसों ने नष्ट कर दिये।
 
All the gardens, the holy ashrams of the sages and the beautiful districts, which were most beloved to the heavenly dwellers, were also destroyed by those immoral and wicked demons. 35 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)