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mahabharat 8.33.31-32: उस तालाब के पास पहुँचकर वे दैत्य पुनः नया जीवन धारण करके समस्त लोकों को कष्ट पहुँचाने लगे। हे राजन! घोर तपस्या से सिद्धि प्राप्त वे दैत्य देवताओं का भय बढ़ा रहे थे। युद्ध में उनका कभी नाश नहीं होता था।   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  8.33.31-32 
तां प्राप्य ते पुनस्तांस्तु लोकान् सर्वान् बबाधिरे॥ ३१॥
महता तपसा सिद्धा: सुराणां भयवर्धना:।
न तेषामभवद् राजन् क्षयो युद्धे कदाचन॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उस तालाब के पास पहुँचकर वे दैत्य पुनः नया जीवन धारण करके समस्त लोकों को कष्ट पहुँचाने लगे। हे राजन! घोर तपस्या से सिद्धि प्राप्त वे दैत्य देवताओं का भय बढ़ा रहे थे। युद्ध में उनका कभी नाश नहीं होता था।
 
On reaching that pond, those demons, taking a new life, again started causing troubles to all those worlds. O King! Those demons, who had attained perfection by great penance, were increasing the fear of the gods. They were never destroyed in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)