श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  8.33.3-4h 
देवानामसुराणां च परस्परजिगीषया॥ ३॥
बभूव प्रथमो राजन् संग्रामस्तारकामय:।
 
 
अनुवाद
राजन! प्रथम नक्षत्र युद्ध देवताओं और दानवों में परस्पर विजय की इच्छा के कारण हुआ था।
 
Rajan! The first battle of stars took place due to the desire of mutual victory between the gods and demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)