Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.33.29-30h: हे प्रभु! उस वरदान को पाकर तारकाक्ष के पराक्रमी पुत्र हरि ने उन नगरों में एक-एक बावड़ी बनवाई, जो मृतकों को जीवन प्रदान करती थी।   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  8.33.29-30h 
स तु लब्ध्वा वरं वीरस्तारकाक्षसुतो हरि:॥ २९॥
ससृजे तत्र वापीं तां मृतानां जीविनीं प्रभो।
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! उस वरदान को पाकर तारकाक्ष के पराक्रमी पुत्र हरि ने उन नगरों में एक-एक बावड़ी बनवाई, जो मृतकों को जीवन प्रदान करती थी।
 
O Lord! After receiving that boon, Hari, the valiant son of Tarakaksh, built a step well in each of those cities, which would give life to the dead.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)