श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  8.33.28-29h 
संतुष्टमवृणोद् देवं वापी भवतु न: पुरे॥ २८॥
शस्त्रैर्विनिहता यत्र क्षिप्ता: स्युर्बलवत्तरा:।
 
 
अनुवाद
संतुष्ट होकर उन्होंने ब्रह्माजी से यह वर माँगा कि 'हमारे प्रत्येक नगर में एक-एक ऐसा कुआँ हो, जिसमें शस्त्रों के प्रहार से मरा हुआ कोई भी वीर राक्षस यदि डाल दिया जाए, तो वह और भी अधिक शक्तिशाली होकर पुनः जीवित हो जाए।'॥28 1/2॥
 
Satisfied, he asked for this boon from Lord Brahma that 'there should be one such well in each of our cities, in which if any brave demon who died due to the blow of weapons is thrown, he will come back to life even more powerful.'॥ 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)