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mahabharat 8.33.25-26h: मयासुर सभी दैत्यों को सभी प्रकार की अप्राप्य वस्तुएं प्रदान करता था। उसकी शरण में आकर सभी दैत्य निडर होकर रहते थे।   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  8.33.25-26h 
सर्वेषां च पुनश्चैषां सर्वयोगवहो मय:॥ २५॥
तमाश्रित्य हि ते सर्वे वर्तयन्तेऽकुतोभया:।
 
 
अनुवाद
मयासुर सभी दैत्यों को सभी प्रकार की अप्राप्य वस्तुएं प्रदान करता था। उसकी शरण में आकर सभी दैत्य निडर होकर रहते थे।
 
Mayasura used to provide all kinds of unobtainable things to all of them. Taking shelter under him all the demons lived without any fear. 25 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)