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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  8.33.24-25h 
मांसाशिन: सुदृप्ताश्च सुरैर्विनिकृता: पुरा॥ २४॥
महदैश्वर्यमिच्छन्तस्त्रिपुरं दुर्गमाश्रिता:।
 
 
अनुवाद
वे सभी मांसाहारी और अत्यंत अभिमानी थे। पूर्वकाल में देवताओं ने उनके साथ बहुत छल किया था। अतः वे महान समृद्धि की कामना से त्रिपुर दुर्ग में शरण लेने आए।
 
All of them were meat eaters and were extremely proud. In the past, the gods had cheated them a lot. Therefore, desiring great prosperity, they came to take shelter in the Tripura fort.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)