श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  8.33.22-23h 
राजतं कमलाक्षस्य विद्युन्मालिन आयसम्।
त्रयस्ते दैत्यराजानस्त्रींल्लोकानस्त्रतेजसा॥ २२॥
आक्रम्य तस्थुरूचुश्च कश्च नाम प्रजापति:।
 
 
अनुवाद
चाँदी का बना हुआ नगर कमलाक्ष के अधीन था और लोहे का बना हुआ नगर विद्युन्माली के अधीन था। वे तीनों दैत्य राजा अपने अस्त्रों के बल से तीनों लोकों को दबाते थे और कहते थे, 'प्रजापति कौन है?'॥22 1/2॥
 
The city made of silver was under the control of Kamalaksha and the city made of iron was under the control of Vidyunmali. Those three demon kings used to suppress the three worlds with the power of their weapons and used to say, 'Who is Prajapati?'॥ 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)