श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  8.33.20 
गृहप्रवरसम्बाधमसम्बाधमहापथम्।
प्रासादैर्विविधैश्चापि द्वारैश्चैवोपशोभितम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वह नगर बड़े-बड़े मकानों से भरा हुआ था। उसकी विशाल सड़कें चौड़ी और संकरी नहीं थीं। तरह-तरह के महल और द्वार उन नगरों की शोभा बढ़ा रहे थे।
 
That city was full of big houses. Its huge roads were wide and without any narrowness. Various types of palaces and gates enhanced the beauty of those cities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)