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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.33.19 
एकैकं योजनशतं विस्तारायामत: समम्।
गृहाट्टालकसंयुक्तं बहुप्राकारतोरणम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
प्रत्येक नगर की लंबाई और चौड़ाई सौ योजन के बराबर थी। सभी में विशाल महल और मीनारें थीं। अनेक प्राचीरें और मेहराबें सुसज्जित थीं।
 
The length and breadth of each city was equal to one hundred yojanas. All of them had large palaces and towers. Numerous ramparts and arches were decorated.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)