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mahabharat 8.33.18: हे पृथ्वी! सोने का बना नगर स्वर्ग में स्थित था। चाँदी का नगर अंतरिक्ष में स्थित था और लोहे का नगर पृथ्वी पर स्थित था; जो आदेशानुसार सर्वत्र विचरण करता था।   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.33.18 
काञ्चनं दिवि तत्रासीदन्तरिक्षे च राजतम्।
आयसं चाभवद् भौमं चक्रस्थं पृथिवीपते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वी! सोने का बना नगर स्वर्ग में स्थित था। चाँदी का नगर अंतरिक्ष में स्थित था और लोहे का नगर पृथ्वी पर स्थित था; जो आदेशानुसार सर्वत्र विचरण करता था।
 
O Earth! The city made of gold was situated in heaven. The city made of silver was situated in the space and the city made of iron was situated on the earth; which used to roam everywhere as per the orders.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)