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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना
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श्लोक 17
श्लोक
8.33.17
ततो मय: स्वतपसा चक्रे धीमान् पुराणि च।
त्रीणि काञ्चनमेकं वै रौप्यं कार्ष्णायसं तथा॥ १७॥
अनुवाद
तब बुद्धिमान मयासुर ने अपनी तपस्या से तीन नगरों की रचना की। उनमें से एक सोने का, दूसरा चाँदी का और तीसरा लोहे का बना था।
Then the wise Mayasura created three cities through his penance. One of them was made of gold, the second of silver and the third of iron.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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