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mahabharat 8.33.10-11h: राजन! तब उन सबने बार-बार विचार करके सम्पूर्ण लोकों के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को सिर नवाकर उनसे इस प्रकार कहा - 10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  8.33.10-11h 
ततस्ते सहिता राजन् सम्प्रधार्यासकृत् प्रभुम्॥ १०॥
सर्वलोकेश्वरं वाक्यं प्रणम्येदमथाब्रुवन्।
 
 
अनुवाद
राजन! तब उन सबने बार-बार विचार करके सम्पूर्ण लोकों के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को सिर नवाकर उनसे इस प्रकार कहा - 10 1/2॥
 
Rajan! Then, after thinking again and again, all of them bowed their heads to Lord Brahma, the Lord of all the worlds, and said to him thus - 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)