Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.32.2-3: हे महामुनि! हे सत्यव्रत! हे शत्रुओं का संताप बढ़ाने वाले मद्रराज! हे रणवीर! शत्रु सेना को भयभीत करने वाले! वक्ताओं में श्रेष्ठ! तुमने कर्ण के वचन सुने हैं। तदनुसार, मैं स्वयं तुम्हें इन राजासिंहों में से चुनता हूँ॥ 2-3॥ | mahabharat अध्याय 8.32: दुर्योधनकी शल्यसे कर्णका सारथि बननेके लिये प्रार्थना और शल्यका इस विषयमें घोर विरोध करना, पुन: श्रीकृष्णके समान अपनी प्रशंसा सुनकर उसे स्वीकार कर लेना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे महामुनि! हे सत्यव्रत! हे शत्रुओं का संताप बढ़ाने वाले मद्रराज! हे रणवीर! शत्रु सेना को भयभीत करने वाले! वक्ताओं में श्रेष्ठ! तुमने कर्ण के वचन सुने हैं। तदनुसार, मैं स्वयं तुम्हें इन राजासिंहों में से चुनता हूँ॥ 2-3॥
‘O great one! O Satyavrata! O king of Madra who increases the anguish of the enemies! O Ranveer! Terrifying to the enemy army! Best among speakers! You have heard Karna's words. Accordingly, I myself choose you among these king's lions.॥ 2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥