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संजय उवाच
पुत्रस्तव महाराज मद्रराजं महारथम्।
विनयेनोपसंगम्य प्रणयाद् वाक्यमब्रवीत्॥ १॥
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज ! आपका पुत्र दुर्योधन मद्रराज महारथी शल्य के पास विनीत भाव से गया और उनसे प्रेमपूर्वक बोला -॥1॥
Sanjaya says - Maharaj! Your son Duryodhana went to the great warrior Shalya, the king of Madras, with a humble attitude and spoke to him lovingly -॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥