श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  8.31.71 
दुर्योधन उवाच
एवमेतत् करिष्यामि यथा त्वं कर्ण मन्यसे।
सोपासङ्गा रथा: साश्वा: स्वनुयास्यन्ति संयुगे॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा, "कर्ण! मैं यह सब कार्य वैसे ही करूँगा जैसा तुम उचित समझोगे। अनेक रथ, घोड़ों से लदे हुए, अनेक तरकसों से युक्त होंगे और युद्धभूमि में तुम्हारे पीछे चलेंगे।" 71.
 
Duryodhan said, "Karna! I will do all this work as you think is right. Many chariots with horses loaded with many quivers will follow you in the battlefield." 71.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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